शुक्रवार, 15 फ़रवरी 2008

तुम खुश हो तो खुश हूँ मैं भी .....!!!!!




तुम खुश हो तो खुश हूँ मैं भी
ये आंखों की चमक तेरी
खुशी देती है मुझको
जब की तुम हो नही यहा कही
आंखों के सामने फिर भी
मैं देख पता हूँ
तुमको (जाने कैसे ??)
तुम्हारे सपनो की अन्ग्रइयो को
तुम्हारी पलको तले खिलती
खुशी की पर्छाईयो को
और महसूस करता हूँ
तुम्हारी मुस्कराहट !!!
तुम्हारे होठों के छोर पर
सिकुराते तुम्हारे गालों को
और खुशी से हस्ती पलको को
जो भीचती जाती है
और उन भीची पलको से झांकती
तुमको (वो तुम ही हो ना !!!!!)
दो बूँदें खुशियों से सजी
आंखों से गिरती हुई
तेरे खिले गालों के छोर तक आ
नीचे टपकती है
मैं देख पाता हूँ
और ........
मैं देख पाता हूँ
तुम्हारी खिलखिलाती सूरत से
झांकती मद्धम सी रौशनी
जो बहुत है मुझे रौशन करने को
मुझमें जीने का फिर उत्साह भरने को
मैं देख पाता हूँ
तुमको देखते मुझे
मेरी खुशी को देखती
तुम और खुश होती हुई
मैं देख पाता हूँ ......!!!!!
तुम खुश हो तो खुश हूँ मैं भी !!!!!!!!

2 टिप्‍पणियां:

विकास कुमार ने कहा…

ऐसी ही एक कविता मैंने लिखी थी. विचारार्थ प्रस्तुत है :

http://vikashkablog.blogspot.com/2006/07/kya-karoon-jo-aankhen-roti-hai.html

HALDI ने कहा…

lovestruck:D