रविवार, 26 अप्रैल 2009

माना की है मेरी खता....!!!!!!!!!!!

माना कि है मेरी खता
लेकिन तुझे है क्या पता


कि जब कोई नजर तुझे
ताकती हैं प्यार से
दिल पर मेरे गिरते है
लाल दहकते अंगार से
और मेरी साँस जैसे
रोक देता कोई है
देख मेरी आँखों को
रात भर ये रोई हैं

माफ़ कर जो हो सके
लेकिन बता मैं क्या करूँ
तुझको न कोई छीन ले
दिन रात मैं डरता रहूँ
जी चाहता है आज मेरा
तुझमें समां सोता रहूँ
गोद में सर रख के तेरे
देर तक रोता रहूँ

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